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विश्वास नहीं होगा लेकिन भारत में भी है ऐसा फोल्डिंग रेलवे ब्रिज, देखने वाले रह जाते है दंग!

"विदेशो में आपने ऐसे ऐसे ब्रिज देखे होंगे तो अपने भी सोचा होगा की काश हमारे देश में भी ऐसा होता, लेकिन आप ये जानकर चौंक जायेंगे के उनसे भी बेहतर एक ब्रिज भारत मे"
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image sources :theworldgeography

दुनिया भर में आपने इंजिनियर्स द्वारा निर्मित फोल्डिंग ब्रिज देखें होंगे जो की पानी के जहाजों को रास्ता देते दिखाई देते है और देखे में काफी आकर्षक लगते है. उन्हें देख कर आप सोचते होंगे की काश भारत में भी ऐसा ही कोई ब्रिज होता! लेकिन शायद आप को पता नहीं होगा की भारत में भी ऐसा ब्रिज उपलब्ध है. 

दुनिया भर के सभी फोल्डिंग ब्रिज पानी के जहाजों को रास्ता देते है लेकिन भारत के बने इस पूल की तो बात ही न्यारी है क्योंकि ये एक रेलवे ब्रिज है और शायद ये ऐसा दुनिया का एकमात्र ब्रिज है. जी हाँ बात हो रही है भारत के पम्बन ब्रिज की जो की रामेश्वरम और मुख्य धरती को जोड़ता है.

143 खम्बो वाला ये ब्रिज मुंबई सीलिंक के बनने तक भारत का सबसे लम्बा सीलिंक था इसकी लम्बाई 2 किलोमीटर है! लेकिन सबसे अद्भुद बात ये है की ये 100 साल से भी ज्यादा पुराना है, 1914 में इसकी नीव रखी गई गई थी और ये आज भी उतना ही मतत्वपूर्ण है.

जाने इस अद्भुद अभियांत्रिकी भारतीय निर्माण के बारे में कुछ रोचक जानकारिया....


image sources : youtube

इसको बनाने की पहल हालाँकि 1870 में ही कर दी गई थी लेकिन इसकी शुरुवात 1911 में हुई और तीन साल में ही ये बनकर तैयार हो गया था. इसका मुख्य आकर्षण है इसपर बना फोल्डिंग पार्ट जो की स्थानीय जहाजों के लिए खुलता और बंद होता है, इसका निर्माण एक जर्मन अभियांत्रिक ने किया था. 

रामेश्वरम और मुख्य भूमि से ये यात्रा का एकमात्र साधन था 1988 तक क्योंकि उसके बाद वंहा एक और सड़कमार्ग भी उसके ही बदल में बन गया. 


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पहले ये यूनीगेज था लेकिन राष्ट्रपति अब्दुल कलाम की सलाह पर रेलवे ने इसे ब्रॉडगेज कर दिया और इसकी क्षमता और भी बढ़ गई. 

लेकिन 1964 में आये एक तूफ़ान ने इस पल को हिला दिया हालाँकि ये पल फिर भी कुछ ख़ास नहीं बिगड़ा लेकिन ट्रैन पलटने से 150 लोग मारे गए थे. धनुष्कोडी में तब भरी तबाही मची थी और आज भी लोग वंहा रहने की हिम्मत नहीं जुटा पाए है क्योंकि उस समय 25 फुट ऊँची सुनामी की लेहरो से सब बर्बादकर दिया था.


image sources : indiatiems

1964 के तूफ़ान में ये ब्रिज क्षतिग्रस्त हुआ था लेकिन तब मेट्रोमैन ई श्रीधरन ने इसे चमत्कारिक 46 दिनों के भीतर मरम्मत कर दिया था. आईटीआई मद्रास के विधार्थियो ने इस पल की सबलता का अनुमान लगाने का फैसला किया है जो की सबके लिए चौंकानी वाली है.

वंही रेलवे इसे यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज साइट में नाम दिलाने में प्रयास कर रहा है, ये पल अब पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है और शायद अब आप भी इसको देखने को उत्सुक हो रहे होंगे.

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