अद्भुद : भारत के इस राज्य में ही है ईसा मसीह की कब्र, तथ्य जानकार चौंक जायेंगे आप....

"जर्मन लेखक होलगर्र कर्सटन ने अपनी किताब ‘जीसस लीव्ड इन इंडिया’ में इस बारे में विस्तार से लिखा है. पहली बार सन 1887 में रूसी विद्वान, निकोलाई अलेक्सांद्रोविच..."

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टीवी पर डॉक्यूमेंट्री सीरीज के द्वारा लगभग सभी को पता ही है की जेजूस यानि येशु की कहानी क्या थी, सूली पर लटकाया गया लेकिन वो कुछ ही दिनों बाद फिर से जिन्दा होकर लौट आये थे. उस दिन 21 अप्रैल थी और इसी दिन की ख़ुशी में ईस्टर मनाया जाता है.

लेकिन जी उठने के बाद फिर वो कहा गए उन्होंने क्या किया और अब वो कहा है? ऐसी मान्यता है (ईसाइयत और इस्लमा की धार्मिक पुस्तकों में लिखा है) की एक दिन येशु फिर लौटेंगे और फिर कब्र में दफन होंगे. लेकिन वो कब्र कंहा है कैसे और कब लौटेंगे इसके बारे में खुलासा नहीं है.

लेकिन उन्नीसवीं सदी के अंत में एक रुसी जानकार ने एक शोध में कुछ ऐसा साझा किया जो की बेहद अनोखा था. उसके बाद कई शोधकर्ताओं ने इसी को दोहराया यंहा तक की भारत सरकार की डॉक्यूमेंट्री में भी ये दावा है की येशु जी उठने के बाद फिर भारत आ गए.

येशु की कब्र भी है भारत में, जाने पुरे तथ्य.....


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खुश हो जाइये असल में ये भारतवर्ष में ही है, पैगम्बर मुहम्मद साब भी अपने अंतिम लम्हो में हिन्द (हिंदुस्तान) आना चाहते थे वैसेही येशु भी भारत ही आये थे. रोमन द्वारा सूली पर चढ़ाए जाने के बाद भी वो बच गए, फिर मध्यपूर्व होते हुए भारत आये  और उनकी बाकी की जिंदगी भारत में ही बीती थी. 

भारत के राज्य जम्मू कश्मीर की राजधानी श्रीनगर के रोजाबल में एक कब्र है, हालाँकि ये कब्र यूजा आसफ़ की बताई जाती है लेकिन शोधकर्ताओं ने दावा किया है की ये शक्श ही येशु मसीह थे. ऐसी बहुत सी किताबे और डोकेमेन्ट्री उपलब्ध है जिसके अनुसार वो कब्र जीसस की ही है.


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एक भारतीय शोध करता लद्दाख गया और वंहा के पुराने धार्मिक स्त्रोतों से उन्होंने जाना की एक बौद्धि संत का नाम येशु था जिसकी कब्र ही येशु की कब्र है जो की श्रीनगर में है. श्रीलंका की बौधि अधिकारी डॉक्यूमेंट्री में भी येशु को एक बुद्ध संत बताया गया है.

कई लोग इस्पे सवाल भी उठाते है तो उनको जवाब ये है की बाइबिल में लिखा है की येशु 12 बार अलग अलग रूप में अलग अलग लोगो को दर्शन देंगे. इसराइल से होते हुए येशु जीसस मार्ग से चलकर अफ़ग़ानिस्तान होते हुए भारत आये थे, इस दौरान उन्होंने 2500 किमी की यात्रा की थी.


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एक कुंवारी कन्या (आश्चर्य जनक ढंग से गर्भवती हुई) से येशु का जन्म हुआ तरह साल तक उन्होंने क्या किया इसका उल्लेख बाइबिल में है. फिर तीस साल तक की कोई चर्चा नहीं लेकिन फिर 30 की उम्र में उन्होंने दीक्षा ली और धर्म का प्रचार शुरू किया जिसके दौरान उनके साथ रोमन वाला घटनाक्रम हुआ.

फिर वो इसा रूट से भारत आये और 80 साल की उम्र तक भारत में रहे, यंहा उन्होंने शादी की और बच्चे भी पैदा किये. पहलगांव में अब जो मुस्लमान रहते है वो असल में यहूदी थे जिन्होंने कालांतर में धर्म बदल लिया, उनके DNA टेस्ट से ये बात साबित हो सकती है उसके बिना इस तर्ज पर की उनका रेहन सेहन यहूदी ही है.

इसके अलावा इजरायल के 10 यहूदी कबीलों के वंशज कश्मीर में है, अहमदिया समुदाय ऊपर बताये गए पुरे घटनाक्रम को जो का त्यों मानता है. रुसी शोधकर्ता भारत सरकार की डॉक्यूमेंट्री भी ये ही कहती है. खानयार के रोजाबल में जो कब्र है, वो उत्तर-पूर्व दिशा में है जबकि मुसलमानों की कब्रें दक्षिण-पश्चिम में होती हैं.

तो रोमन कैथोलिक आदि आदि भले ही न माने लेकिन शोध और स्थानीय मान्यताओं के हिसाब से ये ही सच है...

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