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राम लक्षण ने तो पहन लिए लेकिन क्या हुआ जब सीता जी को भी चिथड़े पहनवाना चाहती थी कैकयी

"वनवास की यात्रा के दौरान राम जी वल्कल (कपड़ो के चिथड़े) पहनकर जाने को तैयार हो गए थे लक्ष्मण ने भी वो ही धारण किये लेकिन दशरथ जी ने सीता जी को इसकी इजाजत नहीं दी"
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image sources : ritsin

"समय का खेल निराला रे भाई समय का खेल निराला, समय के आगे झुकना पड़ेगा चाहे हो तू बलवाला"कहा तो राजकुमार पद पर अभिषेक की तैयारियां चल रही थी और कंहा श्रीराम जी को वल्कल धारण कर वन में जाना पड़ा था. कर्म के लेखो से तो विधाता भी नहीं बच पाता है तो हम कैसे बचे.

कैकयी की शर्त के अनुसार राम जी को वनवास के दौरान रेशमी वस्त्र त्याग कर वस्त्रो के चिथड़े धारण करने थे, इस दौरान वो किसी भी महल में नहीं जा सकते थे और नहीं फलाहार के आलावा कुछ स्वादिष्ट ही ग्रहण कर सकते थे. वो सशत्र ले जा सकते थे और पैरो में खड़ाऊ पहन सकते थे.

राम जी के पीछे पीछे लक्षमण ने भी ये ही सब धारण किया लेकिन लक्ष्मण को महल या नगर में जाने पर कोई पाबन्दी नहीं थी ये और अन्न खाना उनके लिए स्वैच्छिक था. लेकिन सीता जी भी जब उनके साथ जाने को तैयार हुई तो कैकयी ने सीता जी को रेशमी वस्त्र त्याग कर वल्कल धारण करने और सभी आभूषण भी त्यागने की बात कही थी.

जाने तब क्या हुआ ऐसा के संभव नहीं हुआ तब....


image sources : jagran

लक्ष्मण जी ने जो किया वो स्वैच्छिक था लेकिन सीता जी को भी ऐसा करना पड़ेगा ये कह जब कैकयी सीता जी को भी वल्कन पहनवाने लगी तो मूर्छित हुए दशरथ खड़े हो गए और उन्होंने कैकयी को बहुत खोटे वचन सुनाये. उन्होंने कहा की सीता राज घराने की बहु है वो वल्कन पहनने के योग्य नहीं है.

ऋषि वसिष्ठ और दशरथ जी के सारथि सुरथ जी ने भी अनेकोनेक तर्कों से कैकयी की निंदा की और उसे धमकाया तब जाकर वो चुप रही. तब दशरथ जी ने सीता को सम्पूर्ण आभूषणों से सजाने का आदेश दिया था (ताकि वो गहने वनवास में काम आ सके) और जाते हुए को उनको सीता जी की बहुत से वेश रथ में रख कर विदा किया था.

गौर हो की राम जी न तो किष्किंधा नगरी में ही गए थे और न ही विभीषण के राज्याभिषेक पर ही वो लंका में गए थे उन्होंने दोनों ही मौको पर लक्ष्मण को भेजा था. हमारा मानना है की राम जी के सामने जो शर्ते रखी गई थी इससे कम ही लोग वाकिफ होंगे...जय श्री राम 
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