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मगहर में मोदी के बयान पर विवाद क्यों, भगवान् दत्तात्रेय के शिष्य गोरखनाथ जी भी है चिरंजीवी

"गुरु नानक, कबीर और गोरखनाथ के एक साथ बैठने के मोदी के बयान पर नास्तिक विपक्ष हमलावर हुआ लेकिन उन्हें ये मालूम नहीं की गोरखनाथ जी तो चिरंजीवी है और दत्तात्रेय के"
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image sources : intoday

संत कबीर के 500 वे निर्वाण दिवस पर पीएम मोदी मगहर गए थे, इस मौके पर अपने भाषण के दौरान उन्होंने कहा की कबीर, गुरु नानकदेव और बाबा गोरखनाथ ने एक साथ बैठकर आध्यात्मिक चर्चा (गोष्ठी) की थी..." विपक्षी कांग्रेस और कुछ जानकारों ने इसे तथ्यात्मक रुप से सही नहीं माना और कहा कि बाबा गोरखनाथ का काल दोनों संतों से अलग है।

सोशल मीडिया पर गोरखनाथ जी का समय 10वी सदी तो नानक और कबीर को समकालिक बताकर मोदी की ट्रॉल्लिंग शुरू हो गई थी. लेकिन क्या गोरखनाथ जी का समय 10वी सदी से ही शुरू हुआ था और क्या वो 15वी सदी में ख़त्म भी हो गया था? ये काफी गहन विषय है...क्योंकि 

गोरखनाथ जी की समाधी आज भी कंही पर भी नहीं है, इसके अलावा उनके सतयुग में भगवान् दत्तात्रेय जो की त्रिदेवो के अवतार थे से भी संवाद के कई लेख मिलते है. उनके चारो युगो में होने के और कई प्रसंगो की चर्चाये भी मिल जाए तो ऐसे में ये कहना उचित नहीं है की वो 10वीं सदी में थे बाद में नहीं या पहले नहीं.

जाने उन प्रसंगो को जो साबित करते है मोदी के कथन को....


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गोरखनाथ के गुरु मच्छिन्द्रनाथ जी थे, दोनों ने नाथ सम्प्रदाय को सुव्यवस्थित कर इसका विस्तार किया तबसे इस सम्प्रदाय के साधक लोगों को योगी, अवधूत, सिद्ध, औघड़ कहा जाता है. गोरखनाथ असल में भगवान् शिव के अवतार थे जिन्होंने दुनिया को योग (हठयोग) की शिक्षा दी थी.

वो गोरखपुर में रहे तो उनके ही नामपर उस शहर का नाम भी पड़ गया, नेपाल में गोरखा उन्ही गोरख नाथ जी के नाम से जाने जाते है. एक मान्यता के अनुसार मत्स्येंद्रनाथ को श्री गोरक्षनाथ जी का गुरू कहा जाता है। कबीर गोरक्षनाथ की गोरक्षनाथ जी की गोष्ठी  में उन्होनें अपने आपको मत्स्येंद्रनाथ से पूर्ववर्ती योगी थे, किन्तु अब उन्हें और शिव को एक ही माना जाता है.

संत कबीरदास 15वीं सदी के रामभक्त कवि थे जिनके उपदेशों से गुरुनानक भी प्रभावित थे, कबीर और गोरक्षनाथ जी का समकालीन इसलिए भी माना जाता है क्योंकि गोरक्षनाथ जी की एक गोष्ठी में कबीर और गोरक्षनाथ के शास्त्रार्थ का भी वर्णन है। इस आधार पर इतिहासकर विल्सन गोरक्षनाथ जी को पंद्रहवीं शताब्दी का मानते हैं। 


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कबीर और गोरखनाथ के शास्त्र प्रतियोगिता के भी कई वृतांत मौजूद है जिसमे कबीर दास ने गोरखनाथ जी को हार मानने पर मजबूर कर दिया था. अब लोगो को लिखित में सबूत (शिलालेख) चाहिए वो है नहीं है के चलते वो इतिहास और आस्था को धत्ता बताते है तो ये उनकी कमी है.

गोरखनाथ देवीय पुरुष है और उनके जन्म के समय का कोई प्रमाण नहीं है, महाकाल नगरी उज्जैन में गोरखनाथ गोपी चाँद और भरतरी का समाधि (योग करने का स्थान) स्थल आज भी मौजूद है जंहा लोग आते है. 15वी सदी के अंत तक ये स्थान पर उनके होने की साक्ष्य है.

गोपीचंद और भरतरी राजा विक्रमादित्य के ही भाई थी, ऐसे में उनके समय से अगर कबीर के समय तक भी गोरख ज़िंदा रहे तो कोई अतिश्योक्ति नहीं है. राम जी की उम्र भी 11000 साल बताई जाती है क्या उसे दुनिया मानती है? लेकिन रामायण में जो लिखा है वो सत्य है इसलिए मोदी का कथन भी सत्य ही है.

बाकि कहने वालो को तो कहना है वो तो कुछ भी कहते रहेंगे....

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