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जाने राजा बलि की वो ख़ास बातें की आज भी भारत में होती है उनकी पूजा...

"भक्त प्रह्लाद के पुत्र विरोधन पुत्र बलि का नाम तो आपने सुना ही होगा जिनके सम्मान में ओणम मनाया जाता है दक्षिण भारत में, लेकिन आखिर क्या खास बात थी इस राक्षस...."
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image sources: Theholidayinindia

हिंदी कैलेंडर के श्रावण महीने की पंचमी यानि की नाग पंचमी के दिन से दक्षिण भारत में ओणम उत्स्व का आयोजन शुरू होता है जो की रक्षा बंधन के अगले दिन प्रतिपदा को समाप्त हो जाता है. मान्यता है की पंचमी के दिन राजा बलि धरती पर अपनी प्रजा से मिलने आते है और रक्षा बंधन के अगले दिन चले जाते है.

लेकिन आपके जेहन में भी ये बात आई होगी की आखिर एक राक्षस को क्यों पूजते है लोग, जिसने देवताओ से राज्य हथिया लिया था? अगर आपको ये भ्रम है की राक्षसों के भी सींग पूंछ होते है तो आप भी धोखे में है, ऋषि वाल्मीकि जी के भाई दक्ष प्रजापति (दोनों ही प्रचेताओ के पुत्र थे) की 60 बेटिया थी.

उनमे से 13 का विवाह उन्होंने कश्यप ऋषि से किया था इन तरह में से जो दिति थी उनके पुत्र ही दैत्य कहलाये थे तो सभी मनुष्य ही बस कर्मो से उन्होंने इतनी घृणा अर्जित कर ली की आज आप उन्हें मांस भक्षी समझते है. राजा बलि भगवान् विष्णु के परम भक्त प्रह्लाद के पौत्र और विरोधन के पुत्र थे.

जाने उनके शासन की वो बातें जिसके चलते आपको भी होगा उनके चले जाने का अफ़सोस....


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राजा बलि दैत्य था जिसे आप दैत्य क्षत्रिय भी कह सकते है, उनका धर्म है की वो धरी का राज्य जीते और उसका भोग करे! इसके पहले भी सभी दैत्यों ने ये किया लेकिन अधर्मी होने के चलते वो सभी मारे गए, लेकिन भगवान् के भक्त प्रह्लाद ने न्यायपूर्ण त्रिलोकी को जीता और राज्य किया.

लेकिन इंद्र ने धोखे से उन्हें भी हरा दिया और फिर त्रिलोकी हथिया ली, उसके बाद राजा बलि के पिता विरोधन हुए लेकिन वो देवताओ से जित न सके. तब बलि ने ब्राह्मण गुरु भृगु पुत्र शुक्राचार्य को अपना आचार्य बनाया उनके कहे ही वो चले और जल्द ही उन्होंने त्रिलोकी को जित लिया और वो अन्य दैत्यों की नहीं बल्कि न्यायपूर्ण शासन करते थे.

जाने बलि के राज्य की ख़ास बातें...


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राजा बलि के राज्य में सूर्य कभी अस्त ही नहीं होता था वो स्वयं ही सभी ग्रहो का काम करते थे, उनके राज्य में बिना बोये ही खेतो में फैसले उगती और पकती थी किसान सिर्फ काटते थे. न तो अकाल मृत्यु ही थी न ही कोई महामारियाँ, इसी के लिए आज भी उनके निवास (जो शायद दक्षिण भारत में था) के लोग उनके स्वागत में पलक पावड़े बिछाते है.

लेकिन उन्होंने कुछ गलतिया भी की थी जिसके चलते उनका राज्य गया अन्यथा अभी तक रहता राज्य, एक बार खाना कहते समय उन्होंने जूठे हाथो से गाय का घी छू दिया था और दूसरा वो त्रिदेवो को नहीं बल्कि अपने को पुजवाते थे जिसके चलते ही अदिति ने वरदान प्राप्त कर उनका राज्य छीन लिया था.

अगर वो त्रिदेवो की ही पूजा करवाते और घी को जूठे हाथो से नहीं छूटे तो शायद आज भी वो ही राजा रहते, लेकिन एक सच और भी जान लीजिये. भगवान् विष्णु के वरदान के अनुसार अगले इंद्र राजा बलि ही होंगे और तब दिन रात सूर्य तप्त ही रहेगा फिर फलसे खेतो में बिना बोये उगेगी.

लेकिन इसमें अभी काफी समय है 
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