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तीर्थ स्नान के बाद क्यों करना चाहिए मुंडन, जाने तीर्थ करने के नियम....

"तिरुपति जाने वाले सभी अपने बाल वंही देकर आते है लेकिन क्या ये जरुरी है या सिर्फ वंही के लिए जरुरी है? जाने तीर्थ सेवन के नियम और कायदे जो सभी को जानने चाहिए...."
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image sources: parmarthniketan

एक साल के होने से पहले पहले छोटे बच्चो के माँ के गर्भ से आये हुए बालो को तीर्थो में उतारा जाता है जिसे चूड़ाकरण संस्कार कहते है. इसके आलावा बहुत से लोग जब तिरुपति मंदिर दर्शन करके आते है तो वंहा भी वो अपने बाल उतार आकर आ जाते है, आखिर इसका क्या कारण है?

फिल्म OMG में इस्पे तंज कसा गया था की इन बालो का वंहा धंधा होता है, इसमें गलत क्या है जो स्वेच्छा से बाल दे आये थे उनको जलाना तो वर्जित है तो अगर उन्हें बेच कर परोपकार में लगाया जाए तो गलत क्या. जबरन तो कोई बाल देने के लिए कहता नहीं है लेकिन मर्म बहुत ही कम लोग जानते है.

दरअसल बाल हमारे पापो का चिन्ह है, जिन्हे तीर्थो में उतार देने से हमारे उस समय तक के (इस जन्म के) पाप भी धुप जाते है. बस ये ही प्रमुख कारण है तीर्थो में बाल उतार के आने का, लेकिन केदारनाथ-जगन्नाथपुरी-गया तीर्थ और कुरुक्षेत्र तीर्थो में जाकर बाल उतरना वर्जित है (जरुरी नहीं).

जाने तीर्थ सेवन के कुछ नियम जो आपके बहुत काम आएंगे....


image sources: Gayatirthyatra

भारत भूमि पर मनुष्य जन्म पाकर अगर आप तीर्थो का सेवन नहीं करते है तो आपके जीवन को धिक्कार है, ऐसे जीवन जीने से तो जानवरो का जीवन ही अच्छा है.  इस जन्म में आप जो भी कमाते है माँ-बाप, बच्चो और परिजनों के लिए जो करते है वो पहले से ही लिखा गया है आप घंटा कुछ नहीं कर रहे है.

अगर आपने धर्म से कमाए धन से तीर्थ सेवन नहीं किया तो क्या किया, पाप धुलने से ही आपको धर्म अर्थ काम और मोक्ष सभी प्राप्त होंगे या फिर नसीब से. इसलिए जब भी मौका मिले बिना पैसो की फ़िक्र किये खुद भी तीर्थ करे बुजुर्गो और बीवी बच्चो को भी तीर्थ स्नान जरूर करवाए.... लेकिन सावधान....


image sources: asthivisarjan

जी हाँ, तीर्थ जाने से पहले ये तय कर ले की आपको वंहा छोटे से छोटा भी पाप नहीं करना है, अन्यथा पाप धोने के बजाये वंहा किये पाप से आपका भरी नुक्सान हो होगा. जिस तीर्थ में जाने कम से कम एक रात जरूर रुके, पूर्वजो पितरो को पिंडदान दे और खूब दान पुण्य भी करे.

अगर शादी शुदा है तो जोड़े से जाए, माता पिता जिन्दा है तो उनके बिना भी बिलकुल न जाए! पैदल यात्रा से विशेष फल मिलता है, वंही अगर सन्यासी के भेष में जाए तो कहना ही क्या लेकिन अगर शुद्ध ह्रदय से जाएंगे तो समझे परमात्मा आप पे जरूर कृपा करेगा.
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