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अमरनाथ के बारे में ये आश्चर्य जान शीघ्र ही यात्रा पर निकल पड़ेंगे आप....

"अमरनाथ यात्रा के लिए बुकिंग शुरू हो गई है भले ही रास्ता दुर्गम हो लेकिन तीर्थ की राह में अगर मौत भी हो तो वो मोक्षदायी होती है जाने इस विषय में चौकाने वाले तथ्य"
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image sources: Thefinancialexpress

अमरनाथ शिव तीर्थ यात्रा के लिए ऑनलाइन बुकिंग शुरू हो गई है, पिछली बार हुए आतंकी हमले में शामिल सभी आतंकियों को सेना ने मार गिराया है साथ ही चीन ने फिर से नाथुला के रास्ते खोल दिए है जिसके चलते आतंकी हमले की संभावना बहुत कम हो गई है. 14000 फ़ीट की ऊंचाई पर स्तिथ दुर्गम रास्ते के बावजूद भी लोग क्यों जाते है इस तीर्थ?

आज जाने ऐसे कुछ चमत्कारिक तथ्य जिन्हे सुनकर आप भी शायद आज ही बुकिंग करा ले, बर्फ से हर साल प्रकट होने वाले इस स्वयंभू शिवलिंग के दर्शन से मिलता है अतुल्य पुण्य. श्री अमरनाथ गुफा में शिव भक्त प्राकृतिक हिमशिवलिंग के साथ-साथ बर्फ से ही बनने वाले प्राकृतिक शेषनाग, श्री गणेश पीठ व माता पार्वती पीठ के भी दर्शन करते हैं।

देखने वाले कहते है की इस हिमशिवलिंग में इतनी अधिक चमक विद्यमान होती है कि देखने वालों की ऑंखें चुंधिया जाती जो की पक्की बर्फ का बनता है जबकि गुफा के बाहर मीलों तक सिर्फ मट्टी सरीखी बर्फ ही देखने को मिलती है. इसी गुफा के ऊपर पर्वत पर श्रीराम कुंड है, भगवान शिव ने माता पार्वती को सृष्टि की रचना इसी अमरनाथ गुफा में सुनाई थी।

जाने अमरनाथ हिमशिवलिंग के चमत्कारिक तथ्य....


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अमरनाथ गुफा का वर्णन हालाँकि शास्त्रों में है लेकिन कालांतर में लोग जटिल रास्तो और भौगोलिक परिस्तिथियों के चलते इसे भूल गए, बाद में कश्मीर के एक भेड़ पालन ने एक दिन एक साधू को इस गुफा के पास देखा जिसने उसे एक कोयले की बोरी दी जो घर पर जाते ही सोने में बदल गई.

ऐसे जब वो गड़ेरिया वापस धन्यवाद करने लौटा तो इस गुफा में उसने ये पवित्र तीर्थ देखा और सबको बताया तब से कश्मीरी पंडितो की अगुवाई में इस तीर्थ का जीर्णोद्धार हुआ. कहते है की शिव तत्व तो अमर है लेकिन भगवान् विष्णु के अलावा रूद्र भी अमर नहीं है.

लेकिन 11 रुद्रो में से शिव जो की सबसे प्रभावशाली है ने अमरता प्राप्त की है इसलिए उन्हें अमरनाथ कहते है, हालाँकि शिव निर्गुण और सबसे ऊपर की सत्ता है लेकिन रूद्र शिव उनका ही साकार रूप है जिन्होंने अमरता प्राप्त की. इसका भेड़ उन्होंने पारवती से कहा जो की इसी स्थान पे कहा था इसलिए इसे अमरनाथ केहते है.


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पार्वती ने शिव से मुण्डमाल धारण करने का कारण पूछा तो शिव ने कहा की तुमने (पार्वती ने) जितनी बार जन्म लिया उन्ही शरीरो के ये मुंड है. तब पार्वती ने कहा की मेरा शरीर नाशवान है, परन्तु आप अमर हैं, इसका कारण बताये. तब पार्वती की जिद के चलते शिव ने उन्हें सुनाई थी अमरकथा.

भगवान शंकर ने बहुत वर्षों तक टालने का प्रयत्न किया परन्तु अंतत: उन्हें अमरकथा सुनाने को बाध्य होना पड़ा, अमरकथा सुनाने के लिए समस्या यह थी कि कोई अन्य जीव उस कथा को न सुने। इसलिए शिव जी पांच तत्वों (पृथ्वी, जल, वायु, आकाश और अग्रि) का परित्याग करके इन पर्वत मालाओं में पहुंच गए और श्री अमरनाथ गुफा में पार्वती जी को अमरकथा सुनाई।


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अमरनाथ के स्थान पर पहुँचने के पूर्व जो रास्ता उमा महेश्वर ने अख्तियार किया वो ही रास्ता अमरकथा गुफा की ओर जाते हुए तीर्थ यात्री इस्तेमाल करते है. वह सर्वप्रथम पहलगाम पहुंचे, जहां उन्होंने अपने नंदी (बैल) का परित्याग किया, उसके बाद चंदनबाड़ी में अपनी जटा से चंद्रमा को मुक्त किया। 

शेषनाग नामक झील पर पहुंच कर उन्होंने गले से सर्पों को भी उतार दिया, प्रिय पुत्र श्री गणेश जी को भी उन्होंने महागुणस पर्वत पर छोड़ देने का निश्चय किया और फिर पंचतरणी नामक स्थान पर पहुंच कर शिव भगवान ने पांचों तत्वों का परित्याग किया।

शिव-पार्वती ने इस पर्वत शृंखला में तांडव किया था, तांडव नृत्य वास्तव में सृष्टिआ के त्याग का प्रतीक माना गया। सब कुछ छोड़ अंत में भगवान शिव ने इस गुफा में प्रवेश किया और पार्वती जी को अमरकथा सुनाई। किंवदंती के अनुसार रक्षा बंधन की पूर्णिमा के दिन जो सामान्यत: अगस्त के बीच में पड़ती है, भगवान शंकर स्वयं श्री अमरनाथ गुफा में पधारते हैं।

ऐसा भी ग्रंथों में लिखा मिलता है कि भगवान शिव इस गुफा में पहले पहल श्रावण की पूर्णिमा को आए थे इसलिए उस दिन को श्री अमरनाथ की यात्रा को विशेष महत्व मिला। रक्षा बंधन की पूर्णिमा के दिन ही छड़ी मुबारक भी गुफा में बने हिमशिवलिंग के पास स्थापित कर दी जाती है।

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