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भविष्य पुराण: तो क्या रुद्रावतार थे सिख धर्म की स्थापना करने वाले गुरु नानक देव जी?

"15 अप्रैल 1469 को ननकाना साहिब (पाकिस्तान) के एक वैश्य (हिन्दू वर्ण व्यवस्था में से एक) परिवार में जन्मे गुरु नानक हिन्दुओ के भी आस्था के प्रतिक है क्योंकि गुरु"
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image sources: hindustanlink

वर्तमान पाकिस्तान के नानकाबाद में सिक्ख धर्म की स्थापना करने वाले और सिक्खो के पहले गुरु, गुरु नानक जी का जन्म पंद्रहवी सदी के अंत में हुआ था. उनके माता पिता हालाँकि वैश्य वर्ण से थे लेकिन बाद में उन्होंने अलग ही पंथ या धर्म बना दिया जिसका रूतबा आज दुनिया में है.

वैसे भी सनातन में गुरु को भगवान् से बढ़कर माना गया है ऐसे में अगर गुरु नानक को भगवान् माने तो इसमें कुछ गलत नहीं है. लेकिन भविष्य पुराण में कुछ ऐसा लिखा है जिसके चलते तथाकथित हिन्दू धर्मावलम्बियों को भी सिक्ख धर्म की इज्जत करने का एक और बहाना मिल गया.

सिर्फ इस्लमाम को छोड़ कर दुनिया के बाकी सभी धर्म पुनर्जन्म में विश्वास करते है, मुस्लिम और ईसाइयो में भले ही मौत के बाद लाश को दफनाने की परंपरा हो लेकिन हिन्दू और सिक्ख दोनों ही धर्म में लाश का अंतिम संस्कार ही किया जाता है. गुरु को दोनों भगवान् मानते है, दोनों ही धर्मो में लाश का अंतिम संस्कार होता है.

जाने ऐसी ही समानताये और भविष्य पुराण का रहस्य भी...


image sources: gurbani

दोनों ही धर्मो में निर्गुण और सगुन दोनों ही तरह की आस्था का प्रतिपादन है, दोनों सत्य को ही सबसे ऊपर मानते है. दोनों ही धर्मो में गाय को पवित्र माना गया है, दोनों ही धर्मो में कर्म की प्रधानता कही गई है और दोनों में ही तीर्थो का बहुत महत्त्व है लेकिन एक और समानता अब हम बता रहे है जो आपको चौंका देगी.

शास्त्रों में जो लिखा है वो शाश्वत है वो अलग बात है की किसी को विश्वास होता है तो किसी को नहीं, इसलिए ये अपनी अपनी आस्था का विषय है. लेकिन हिन्दुओ के लिए ये बात जान्ने योग्य है की गुरु नानक असल में रुद्रावतार दुर्वासा ऋषि के ही पुनरावतार कहे गए है.

है न अजीब संयोग, वास्तव में दुनिया में जितने मनुष्य है उतने ही धर्म है क्योंकि सबकी आस्था अपनी अलग अलग होती है और इसलिए धर्म भी उसका वही है. बाकी जो दुनिया में प्रचलित धर्म कहे गए है वो वास्तव में पंथ (रास्ते) भर है जो परमात्मा को पाने के उपाय बताते है.

story sources: bhavishya puraan
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