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कभी पैदल चल के मेले में घूमने जाते थे मनोज तिवाड़ी, जलेबी खाने के पैसे नहीं थे तो लड़े थे कुश्ती.....

"मनोज तिवाड़ी आज बीजेपी में दिल्ली से एमपी है और दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष भी है इसके पहले वो भोजपुरी हीरो एंकर सिंगर भी रहे है. लेकिन यंहा तक का उनका सफर चुनौती पूर्"
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image sources: jogira

"सफलता रातो रात मिलती है लेकिन वो रात कितनी लम्बी होती है ये बयान नहीं किया जा सकता है!" भले ही आज आप हो या बिहार का बच्चा बच्चा सब मनोज तिवाड़ी को जानते है लेकिन एक अनजान शक्श से एक जानदार शक्शियत बनने का उनका सफर कैसा रहा है ये जान्ने की कोशिश कितनो ने की.

आज वो अभिनय और सिंगिंग छोड़ कर सेवा के लिए राजनीती में उत्तर गए है और अब दिल्ली से एमपी भी है लेकिन यंहा तक आने का उनका सफर बेहद संघर्ष पूर्ण रहा है. नेपोटिस्म के चलते बॉलीवुड में आसानी से कोई भी पारिवारिक शक्श अपनी पहचान बना सकता है लेकिन एक अनजान के लिए ये आसान नहीं होता.

अक्षय कुमार ने जब फिल्मो में एंट्री की थी तब एक्शन हीरो (ब्लैकबेल्ट) की तौर पर उन्हें एंट्री मिल गई थी और बाद में उन्होंने अपना संघर्ष किया और मुकाम हासिल किया. लेकिन एक साधारण गरीब बिहारी से कौन अपेक्षा कर सकता है की वो इतने जुझारू शक्शियत के धनी होंगे.

जाने कुछ बातें मनोज तिवाड़ी के संघर्ष की....


image sources: hindustantimes

मनोज तिवाड़ी और रविकिशन दो एकमात्र भोजपुरी स्टार्स है जिनकी फीस लगभग 65 लाख रूपये प्रति फिल्म है, हालाँकि मनोज तिवाड़ी पहले सिंगर थे और बाद में एक्टर बने. दस साल सिंगिंग करके खूब शोहरत बटौरी और जब एक्टिंग का मौका मिला तो गदर मचा दिया. 

उन्होंने फिल्मो में एंट्री 2003 में की "ससुरा बड़ा पैसे वाला" फिल्म से पदार्पण किया और ये फिल्म इतनी बड़ी हिट रही की वो रातोरात छा गए.


image sources: DUBeat

उसके बाद तो भोजपुरी सिनेमा में वो ही वो दिखाई देते थे, हालाँकि सिंगर बनने के लिए उन्हें पहले संघर्ष करना पड़ा था. आज वो पैसेवाले है लेकिन उन्होंने वो गरीबी भी देखि है जब पेट में भूख की आग लगी और जेब में अठन्नी भी न थी. एक रियलिटी शो में उन्होंने अपने निजी जीवन के उन दिनों के कुछ राज सार्वजनिक किये.

बचपन में उन्हें मेले का बहुत शौक था, मेले में जाने के लिए उधर की साइकिल पर 10-12 किलोमीटर चके जाते थे, मेले में उन्हें भूख लगी और जलेबी खाने का मन किया लेकिन जेब में पैसे नहीं थे. तब वो कुश्ती के अखाड़े में उत्तर गए और पैसे जित कर फिर उनसे जलेबिया खाई.

शायद ये ही वजह रही है की वो जमीन से जुड़े है और अब राजनीती में आकर सेवा के जरिये अपने ही भाइयो का भला करने की सोच रहे है. पहले उन्होंने समाजवादी पार्टी के लिए प्रचार किया था लेकिन शॉटगन शत्रघ्न को देख कर उनका बीजेपी की तरफ रुझान हुआ और आज वो नामी नेता है.
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