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शनि को धंधा बना लिया है पाखंडियो ने, शुक्र की 20 सालो की लगती है दशा! जाने कौन से गृह की कितनी

"शनि मंदिर में आजकल भगवान् के मंदिरो से ज्यादा भीड़ दिखती है, वजह है डर! जबकि हक़ीक़त ये है की शनि से ज्यादा घातक शुक्र महादशा है जो 20 सालो की होती है! जाने सच को "
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जब किसी को डर होगा तब ही वो भगवान् में आस्था रखेगा अन्यथा अगर सक्षम है तो वो निष्कंटक आनंद लेगा अपने ऐश्वर्य का, इसलिए शायद भगवान् ने पाप पुण्य का विधान किआ है नहीं तो लोग राक्षस बन जाते. लोगो में नास्तिकता बढ़ी तो भगवान् का भय भी अब खत्म हो गया है लेकिन फिर भी राहत नहीं है.

हर किसी के जीवन में कुछ न कुछ चाहे छोटी हो या बड़ी समस्या जरूर होती है और समस्या में घिरते ही उन्हें पंडित याद आता है और पाखंडी पंडित भी इस मौके का फायदा उठा कर पैसे वालो का खूब खून चूसता है. भगवान् से डर रहा नहीं इसलिए पाखंडी पंडितो ने लोगो को शनि के नाम से डराना शुरू कर दिया है.

इसका ही नतीजा है की जिसे कोई पूछता नहीं था कलियुग में अब शनि मंदिरो में भगवान् के मंदिरो से ज्यादा भीड़ उमड़ती है, पैसे वाले तेल लेकर हर शनिवार शनि मंदिर में पहुँच जाते है. लेकिन असल में ये सच नहीं है, शनि से भी घातक दशा है शुक्र की जो की 20 साल की लगती है.

जाने कौनसे गृह की कितनी लगती है महादशा, शनि से भी भयंकर देते है कष्ट....


image sources: pinterest

ज्योतिष शास्त्र में नव गृह बताये गए है जो की हर मनुष्य की राशि (जन्म लग्न) के हिसाब से प्रभाव डालते है, ज्योतिष शास्त्र से उनका दुष्प्रभाव कम किया जा सकता है टाला नहीं जा सकता है. 

अस्सी प्रतिशत भारतीयों को ये पता ही नहीं है की शनि के आलावा अन्य ग्रहो की भी दशा लगती है या नहीं, ये नौ गृह क्रमशः ऐसे है: केतु, शुक्र, सूर्य, चंद्र, मंगल, राहु, बृहस्पति, शनि और बुध! इनमे से शुक्र की दशा सबसे लम्बी अवधि की होती है जोकि 20 वर्षो तक रहती है. 


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केतु की 7 वर्ष की तो सूर्य की 6 साल की महादशा लगती है, ऐसे ही चन्द्रमा की 10 तो मंगल की 7 वर्ष की महादशा होती है! बृहस्पति की 16 बुध की 17 तो राहु की 18 साल की महादशा लगती है अब इन सबको छोड़कर केवल शनि को तेल चढ़ाएंगे तो ये गृह भी आपको परेशां कर्नेगे के नहीं?

इसलिए पाखंडियो के चक्करो में मत पढ़िए, जो कर्म किये है उनका फल भोगना ही पड़ेगा आप भगवान् से बढ़कर नहीं है! इस जन्म में जो कर्म करेंगे उनका फल अगले जन्म में मिलेगा इसमें नहीं (अगर पाप पुण्य का शेष बराबर है तो ही इसमें), इसलिए जम के दान करिये लिए सत्पात्र को कुपात्र को नहीं अन्यथा फल उलटा होगा.

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