गरुड़ पुराण: धर्म बदलने वाले बनते है प्रेत, फिर नहीं मिलता है मनुष्य जन्म...

"पैदा होकर मनुष्य को क्या करना चाहिए जिससे की उसकी मुक्ति (मोक्ष) हो ये उसे धर्म ही बताता है, कई लोगो को मजे की जिंदगी मिलती है तो कई दुःख ही भोगते है बस, जाने.."
दुनिया पैदा हुआ हर इंसान अपने कर्मो को भोगता है, जन्म के समय ही उसके नसीब में कितने सुख दुःख है कितना पैसा है कैसा उसका स्वस्थ रहेगा और तो और उम्र भी तय होती है! अपने कर्मो से वो नियत उम्र 100 वर्ष पुरे नहीं कर पाता है, अगर कर्म अच्छे करे तो 100 वर्ष जीवित रहना सम्भव है!

लेकिन उसकी किस्मत में सीधे तरीके से कमाए गए पैसे को वो नहीं बढ़ा सकता है, हो सकता है की पाप की कमाई से वो अपनी किस्मत बदल ले लेकिन तब भी सुख दुःख तो भोगने ही पड़ेंगे! कई लोग किसी विशेष जाती धर्म में जन्म कर दुसरो को अपने से बेहतर मानकर उनके धर्म या जाती में आकर्षित होते है और अपना धर्म बदल लेते है, लेकिन....


image sources: blogspot

अगर को अपना धर्म बदलता है तो उसका अंजाम बहुत बुरा होता है, वेदव्यास जी द्वारा लिखे गए 18 पुराण जो की वेदो के ही अंश है में लिखा है उन लोगो का अंजाम! साथ भी भगवान् कृष्ण ने गीता में भी अर्जुन को बताया है धर्म न बदलने के विषय में धर्म बदलने से होने वाले दुष्परिणामों के बारे में.

गीता में कृष्ण ने अर्जुन को कहा की मनुष्य को किसी भी सूरत में अपने धर्म (कर्तव्यों को) को नहीं छोड़ना चाहिए, अपने धर्म में मरने से सद्गति मिलती है जबकि दूसरे का धर्म भय ही देता है और कुछ नहीं! जबकि गरुड़ पुराण में इससे भी आगे बढ़ के इस विषय में और भी लिखा है. 


image sources: allindiaroundup

गरुड़ पुराण की माने तो अगर को मनुष्य स्वेच्छा से अपना धर्म बदलता है तो उसकी मुक्ति फिर नहीं होती है और मृत्यु के बाद वो प्रेत (बहुत पिशाच) हो जाता है और अखंड काल तक वो इसी रूप में तकलीफे भोगता है! इसका सीधा सा मतलब है की अगर आप इस जन्म में उपेक्षा भोग रहे है तो वो भी आपके कर्मो की वजह से.

हर मनुष्य को अपने कर्मो का फल भोगना ही पड़ेगा, क्योंकि कर्मो के फल का नाश भोगने से ही होता है धर्म बदलने से नहीं इसीलिए हर मनुष्य को अपने धर्म का ही पालन चाहिए हर कीमत पे.

story sources: garun puran shrimadbhagwat geeta

Share This Article:

facebook twitter google